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Hymn No. 841 | Date: 12-Mar-1999
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मगन होने लगा हूँ तुझमें, दिल को लगन लग गयी जो तेरी ।
मगन होने लगा हूँ तुझमें, दिल को लगन लग गयी जो तेरी ।
मन की आग बुझती जा रही है, जैसे-जैसे करीब होते जा रहे हैं तेरे ।
अपनों का तो था तू, गैरो पे प्यार बरसाते देखा आके करीब तेरे ।
दिल के दरिद्र हम, सानिध्य पाके बरसाते देखा आके करीब तेरे ।
जीते हुये जीना सीखा, मौत न हो ऐसी जीवन का भेद पाया तुझसे ।
दूश्वारीयों से भरी थी राह, गीत गाते हुये मुस्कराके आगे बढ़ना सीखा ।
भेद तूने बहुत से बतलाये जीवन के, मन के हर भेदो को मिटाते हुये ।
हर अनजान पहलु से मुलाकात करायी, स्वप्न से भरी दुनिया को छोड यथार्थ में जीना सिखाया ।
कृपा तेरी अनगिनत है, सत्य को स्वरूपमय पाया आके करीब तेरे ।
नादान दिल को जो प्यार हुआ तुझसे, त्रिलोक का अतुल्य साम्राज्य पाया ।


- डॉ.संतोष सिंह