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Hymn No. 843 | Date: 12-Mar-1999
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मेरी सारी जदोजहद टूट जाती है, तेरे प्यार की हद में आके ।
मेरी सारी जदोजहद टूट जाती है, तेरे प्यार की हद में आके ।
कितना भी रहूँ सजग, तुझे देखते ही गवाँ बैठ़ता है होश अपना ।
नशा ऐसा कैसा है, बिन पिये हर पल बढ़ता जाता है ।
साथ सबका छूट जाता है, जब अपने पास तुझको पाता हूँ ।
इम्तहान की परवाह न है तेरे, प्यार में मगन हूँ मैं अपने ।
जागते हुये देखता हूँ सपने, टूटने पे निकलेगा प्राण मेरा ।
रही कोई बात न अधूरी, कह गया दिल ही दिल में तुझसे पूरी ।
जुड गया हूँ जबसे मैं तुझसे, जीवन का हर लम्हा तेरा हो गया ।
मत पूँछ क्या हो गया, जब से मैं तेरा साथ पा गया ।
गैर और अपनों का साथ छूटते देखा, तुझे मैने सबसे देखा ।


- डॉ.संतोष सिंह