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Hymn No. 844 | Date: 12-Mar-1999
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हर मुश्किल सी है हो जाती है, जब सदगुरु का साथ है मिल जाता ।
हर मुश्किल सी है हो जाती है, जब सदगुरु का साथ है मिल जाता ।
अनजानी राह भी जाना क्यूँ लगता है, जब हाथों में हाथ होता है उसका ।
कहा हुआ सब कुछ सुना-सुना सा लगता है, जब रहते है ख्याल में उसके ।
बताना मुश्किल है हर बात, रोम-रोम आनंद में झूमता है जब पाया वो है रहता
व्यर्थ होके बेअर्थ है हर बात, जीवन मरण का अहसास हो जाता है हवा सुनके गीत उसे ।
दुनियाँ की नजरों से पिलाता है, अपने प्यार का जाम, मतवाला बना देता है हमें
कैसे कहूँ अच्छा-बुरा कुछ न होता है, पास उसके सब कुछ होके कुछ न होता है ।
हर लम्हा बगैर उसके उदास सा रहता है, याद ते ही खुशनुमा हो जाती है फिजा
लेता नहीं किसीसे कुछ, देना उसे भाता है चाहे कोई माने या नमाने अपना ।


- डॉ.संतोष सिंह