VIEW HYMN

Hymn No. 845 | Date: 12-Mar-1999
Text Size
रंग ला रही है हमपे प्यार की जंग, तरंग है कुछ ऐसी मगन हूँ आज मैं ।
रंग ला रही है हमपे प्यार की जंग, तरंग है कुछ ऐसी मगन हूँ आज मैं ।
जुदा-जुदा हूँ सबसे, जबसे प्यार में फिदा हुआ हूँ मैं तेरे ।
मत पूछ तू कुछ मुझसे, प्यार के सिवाय अब कुछ न है पल्ले पड़ता ।
मेरा मैं मिट चुका है तेरे पहलूं में सिमट के जुदाई का डर है किसको ।
भावो में बह रहा हूँ तेरे, ज्वार जो उठ रहा है प्यार का मन में मेरे ।
क्यों पूँछता है मुझसे ठिकाना, तलाश कर ले मुझको पहलूं में तेरे ।
कहां कोई अपना और बेगाना, दीवानों के नजरो में है सब दिवाने ।
कुर्बान क्यों होने चला मैं तुझपे, प्यार में जो सारे भेद मिट-चुका है मेरे तेरे होने का ।
अंदाज होगा प्यार जगने का अलग कुछ मेरा, पर है क्या ये कम है ।
दंग न होना देखके मेरे प्यार का ढंग, ये सब कमाल तेरे प्यार का ।


- डॉ.संतोष सिंह