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Hymn No. 847 | Date: 01-Jan-1900
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न सोचना होता है, न ही विचारना पड़ता है ।
न सोचना होता है, न ही विचारना पड़ता है ।
प्यार में प्यार के सिवाय बस मदहोशी का आलम होता है ।
हर पल के संग चढ़ती ओर उतरता है पैमाने का नशा ।
नामो निशान न होता है उतरने का हर पल चढ़ता है तेरे प्यार का नशा ।
लड़खड़ाते हुये कदम सधके चलते है तेरे प्यार में के झोको के संग ।
सरूर छाया रहता है तेरे प्यार में जो हम दिन-रात डूबे रहते है ।
मत पूछ मिलन में, बिन कहे हाले दिल बया करते है ।
परवाह रहती नहीं किसीकी, बेपरवाह रहता है प्यार में इतना ।
कोई क्या कर लेगा, प्यार करने वाले कुर्बान होते है पहले प्यार बाद में है करते
उसूल कुछ नहीं होता है प्यार में, हर असूल टूट जाता है प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह