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Hymn No. 849 | Date: 14-Mar-1999
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जलते हुये अंगारों पे से चलके, करीब पहूँचना पड़ा तो पहुचेंगे ।
जलते हुये अंगारों पे से चलके, करीब पहूँचना पड़ा तो पहुचेंगे ।
आंधी आये या तूफाँ डिगा नहीं सकता, कोई हमें करीब आने से तेरे ।
जाती है जान तो इक बार नहीं सौ बार दे देंगे जान तुझपे, पास आयेंगे जरूर तेरे ।
ऐ रहबर तेरे करीब आने के लिये जग की समस्त शक्तियों से टकराना पड़ा तो टकरा जायेगा ।
बस न चलता है तो हमारा हमारे पे, पकड़के चलते हैं न जाने कब छूट जाता है ।
दुष्कर से दुष्कर कार्य करने से साध्य बन जाता है, इसके आगे निष्फल हो जाते है हम ।
चला लेते हैं हर ओर अपनी, इसके आगे चल नहीं पाती कोई कथनी करनी ।
अजीज आ जाता हूँ जब अपने से, आपको अपनी राहों से भटकता देखता हूँ ।
डरा नहीं हूँ हैरान हो जाता हूँ, चाहता क्या हूँ और क्या हो जाता है ।
प्रभु तेरे साथ जब तक रहता हूँ, सामर्थ्यवान खुदको पाता हूँ, दूर होते ही तुझसे असहाय हो जाता हूँ ।
- डॉ.संतोष सिंह
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मत पुछो देवेन्द्र हाल क्या होता है हमारा, निमग्न रहता है तू तो आनंद में ।
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