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Hymn No. 850 | Date: 14-Mar-1999
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आहत करता दिल को मन हमारा, राहत मिलती है तेरे पास आने से ।
आहत करता दिल को मन हमारा, राहत मिलती है तेरे पास आने से ।
जानते हुये सब कुछ संभाल नहीं पाते खुद को, ऐ खुदा फिर भी आस रखते है तुझसे ।
श्वास का चलना बंन्द होना नियति है हमारी, तेरा बन जाने के लिये कृपा होनी जरूरी है तेरी ।
अपनी शरारतों से बाज नहीं आते, मुस्कराहट देखके तेरी शर्म आ जाती है अपने ऊपर ।
अंजाम जो होगा देखा जायेगा, प्रभु तेरे पास आने से न कतरायेगे हम कभी ।
कुछ घोर नहीं होता है सबकुछ जायज होता है, सजा जो भी मिले तेरा नाम लेके भूलते जायेंगे ।
परिणाम से क्या डरना, सब कुछ होता है तेरी सहमति से इस जग में ।
सच को तू है जानता, हम कैसे भी है हमारी चाहत को तू है पहचानता ।
मुलाकातों के सिलसिले को बदलना है मिलन में, तु जो चाहा वही होता है ।
कमी हमारे में लाख हो, तेरी इक नजर काफी है हमारी कमजोरी दूर करने के लिये ।
- डॉ.संतोष सिंह
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