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Hymn No. 854 | Date: 15-Mar-1999
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ऐ साकी पिला दे हमें पैमाने में प्यार घोल के मदहोश हो जायें ।
ऐ साकी पिला दे हमें पैमाने में प्यार घोल के मदहोश हो जायें ।
कसर कोई बाकी न रह जाये असर हो इतना जीने का होश न रह जाये ।
खबर न हो पीने की प्यार की मदहोशी में खुद खबर बन जायें ।
रोना – हँसना कुछ मालूम न हो हमें, मदहोश रहें तेरे प्यार में इतना ।
अगर सताना लगता है तुझको ये इतना, माफ करना प्यार का जाम पीने देना तू हमें ।
जो दूरियाँ है तेरे–मेरे बीच की, उसको आज का आज मिटा देना ।
गलत और सही हमें कुछ मालूम नहीं, प्यार के नशे में हमें हमारा होश नहीं ।
सलामत रहने की कोई चाहत न बची है, तेरे प्यार में जो मिट गये हम ।
श्वासों का लेना न लेना हो गया बेअसर, जो रहते हैं खोये प्यार में तेरे ।
कह सकता है तू इसको सोना, सोने में भी देखते है बस ख्वाब तेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह