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Hymn No. 855 | Date: 15-Mar-1999
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कसम है तुझको मेरे आसुओं की, जो उपजे हुये हैं दिल से ।
कसम है तुझको मेरे आसुओं की, जो उपजे हुये हैं दिल से ।
खता मेरी है बस इतनी जो दिल लगाया तुझसे ।
परिणाम की परवाह है किसे, तडपा ले तू चाहे मुझे कितना ।
सह सकता हूँ मैं सब कुछ तेरा, नजरअंदाज करना सह नहीं पाऊँगा ।
बाजी लगा दुँगा जान की तेरा प्यार पाने के वास्ते ।
राह में जो भी रोडे आयेंगे पार कर जाऊँगा नाम लेके तेरा ।
रुकना-रोकना न है अब हाथों में मेरे जो हो चला मैं तेरा ।
तेरे सिवाय किसी और का साथ न है हमको गँवारा ।
हक है या न है मुझे नहीं पता, पर तेरे सिवाय कोई न है मेरा ।
टूट जाऊँ या लुट जाऊँ कोई बात नहीं, बात एक ही है दिल में तेरे प्यार की ।


- डॉ.संतोष सिंह