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Hymn No. 856 | Date: 15-Mar-1999
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जो तू चाहे वही तय है होना, हाथ में होके कुछ न है हमारे ।
जो तू चाहे वही तय है होना, हाथ में होके कुछ न है हमारे ।

कर्मो से अनुबन्ध है पुराना, एक तेरा ही तो है सहारा ।

बीता सब कुछ वक्त के संग, जब तू चाहे तब पास आये तेरे ।

धड़कता था दिल सीने में पहले भी, प्यार तो अब हुआ है तुझसे ।

जान न पाते थे कुछ, बीती बातें बिसार चुके थे ।

तेरे पास जो आया याद आने लगा सब कुछ, पता नहीं कैसे तेरे बिन जीते थे।

वख्त का है खेल, हर कहानी मगरूर होके खत्म होती है ।

सच्चाई है ये जीवन की, पर्वत सा समय गुजरने पे क्षण भर का है लगता ।

गुजारिश है मेरी तुझसे, जो फूल खिला है मन में मेरे प्यार का ।

समय के संग बढता रहे, अर्पित करना है तेरे श्री चरणों में ।


- डॉ.संतोष सिंह