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Hymn No. 857 | Date: 15-Mar-1999
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प्यार का चक्कर है, न मेरा पागलपन ।
प्यार का चक्कर है, न मेरा पागलपन ।
होशो हवास में हूँ, तेरे प्यार का शिकार हूँ ।
आकार ले रहा है, हर दिन नये-नये तराने ।
साकार करूँगा हर वो सपना, जो जुड़के देखा है संग तेरे ।
प्यार तो था पहले से, मालूम हुआ पास आके तेरे ।
सताया कौन किसीको, शिकार तो हुआ दिल बिचारा ।
उफ तक न करता है, मरता रहे चाहे वो ।
प्यार तुझे इतना है करना, कानोकान खबर न होने दे किसीको ।
तू है अपना इसलियें होता है रूसवा, जानके झुम उठता है दिल ।
गैरो की रुसवाई न होती है, औरो के लिये, कम से कम हम है तेरे अपने ।
बात पे बात पे चर्चा होती है तेरे प्यार भरे हरकतो की ।
शिरकत कर लेता है ये नाचीज, कृपा से तेरी महफिल में ।


- डॉ.संतोष सिंह