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Hymn No. 858 | Date: 17-Mar-1999
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दिल की कहूँ तो, पल भर न गुजरे तेरे बिना ।
दिल की कहूँ तो, पल भर न गुजरे तेरे बिना ।
गाहे बहाहे किसी न किसी बहाने याद आ जाती है तेरी ।
तसब्बुर न मिलता है, रहे चाहे तू कितना भी देर संग मेरे ।
हद हो गयी है पल पर्वत सा नजर आता है तेरे बिना।
शीकायत न है मेरी, ये तो हाले दिल बया करता हूँ ।
तन जुदा है तुझसे कोई गल नहीं, दिल धडक नहीं पाता बिन तेरे ।
रमा रहना चाहता हु तूझमें, कुछ न कुछ अफसाना याद करके ।
जीवन में जब से तु आया, हमको जमाना रास नहीं आता ।
सांसो से मेरे बस गया है तू, देख ले पास आके मेरे ।
कोई कोना न बचा है इस संसार का, जो याद न दिलाता हो तेरी ।


- डॉ.संतोष सिंह