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Hymn No. 859 | Date: 17-Mar-1999
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जमाने से क्यों करुँ शिकायत, जब मन ही करता हो बगावत ।
जमाने से क्यों करुँ शिकायत, जब मन ही करता हो बगावत ।
दिल तुझे चाहे, तन कहीं और ले जाये, विषम परिस्थितीयों से उबारना होगा मुझे ।
तू बता क्या करना है मुझको तेरे लिये, कमजोर मन है कमजोर दिल नहीं ।
तेरा हाथ है मेरे पीछे तो कोई हरा दे इतना दम नहीं ।
गम न करता हूँ किसीका, तेरा होने न होने पर चाहता हूँ रजामंदी तेरी ।
हर बात का करता हूँ शुक्रिया अदा, बिन भेद किये अच्छे-बुरे का ।
सवाल कई खड़े होते हैं मन में, सौंपता हूँ सब के सब तुझे ।
देर और जल्दी की है बात नहीं. तू करता है सब कुछ समय पे ।
अंदाज लगाना है मुश्किल, तुझे फसाने के लिये क्या है करना ।
मैं तो दीवाना हूँ जो तूने बनाया, प्यार के सिवाय कुछ आता नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह