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Hymn No. 860 | Date: 18-Mar-1999
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कभी माँ लगता है तू, कभी पिता बन जाता ।
कभी माँ लगता है तू, कभी पिता बन जाता ।
कभी प्यार बन जाता है, तो कभी यार नजर आता ।
बंधु न मिलेगा तुझसा कोई दूसरा, ऐ मेरे सैय्याँ
होश में आता हूँ जब अपने तो सदगुरु को याद करता हूँ ।
मदहोश रहने दे प्यार में तेरे जहाँ बदले हर पल रिश्ता ।
मुझे और कुछ न चाहिये, कर लेने दे प्यार जी भरके ।
लिपट जाना चाहता हूँ तुझसे, तेरी जुदाई भूलके लब चूम लूं ।
परवाह नहीं अब मुझे किसीकी, प्यार में तेरे मंजूर है हर सजा ।
बचा कुछ न है पास मेरे, मैं तो चला प्यार के पास अपने ।
अब साथ न निभा पाऊँगा किसीका, जो पकडा साथ तेरा ।


- डॉ.संतोष सिंह