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Hymn No. 862 | Date: 18-Mar-1999
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बस गया है मेरे जेहन में, तेरे प्यार का नशा ।
बस गया है मेरे जेहन में, तेरे प्यार का नशा ।
किस्सा जो शुरु हुआ प्यार का, मेरा अंत आ गया करीब ।
समझ में न आया कुछ, ये क्या से क्या हो गया ।
ऐ सखा हम तो तेरे प्यार में जीते जी हलाल हो गये ।
सोचा ना था कभी, समझने का वक्त न मिला ।
प्यार की राह पे, मेरा काम तमाम हो गया ।
न मौका मिला गम करने का, इतना हुये प्यार में मसरूफ हम ।
सोचा न था, बेधड़क प्यार की राहों पे चल पड़ेगे हम ।
हिचक है न कहीं मन में, तन भी लगता है जुदा-जुदा ।
ऐ खुदा जो प्यार में तेरे करीब होते जा रहे हैं हम ।


- डॉ.संतोष सिंह