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Hymn No. 863 | Date: 18-Mar-1999
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प्रभु सुनना चाहता हूँ कुछ तेरी, आज तक हमने सुनाया तुझे बहुत कुछ अपना
प्रभु सुनना चाहता हूँ कुछ तेरी, आज तक हमने सुनाया तुझे बहुत कुछ अपना
तू किससे कहता होगा हाल अपने दिल का, क्या मचलता है कभी तू किसी के लिये ।
बता दे आज तू मुझको ऐसा क्या किया था उसने तू सुनाता है अपनी हर बात उसको ।
तेरे लिये तो लोग बिछाते है पलक पांवड़े, तू क्यों बिछाता है उनके वास्ते पल़क पांवड़े ।
मिटा देता है हर भेद दिल का, उधरो पे जैसे कमल खिल जाते है अनको ।
कह दे आज तू मुझसे सब कुछ, क्या कुछ करना पड़ता है इसके वास्ते ।
मैं रहके भी न रहना चाहता हूँ खुदका, कैसे भी करके हो जाना चाहता हूँ तेरा।
तेरा कहाँ हुआ करने के लिये लगा दूंगा बाजी जान की बस तू देते रहना आशीश ।
रही-सही जो भी कमी है हममें मिटा दूंगा उसे लेके तेरा नाम ।
बस तू इतना करना पिलाते जाना पल-पल प्रभु तेरे प्यार का जाम ।


- डॉ.संतोष सिंह