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Hymn No. 864 | Date: 19-Mar-1999
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कब क्या हो जाये, किसीको न पता, तेरा साथ मिला, जितना भी तेरी है कृपा।
कब क्या हो जाये, किसीको न पता, तेरा साथ मिला, जितना भी तेरी है कृपा।
वश में कुछ नहीं हमारे, हम तो है तेरे सहारे, नाकाबिल को काबिल बनाना है हाथों में तेरे ।
बरसाया है तूने प्यार सदा हमपे, फिर भी तेरी राह में बिछाए काटें हमने कईबार ।
तोड़ना चाहता हूँ सिलसिला खौफनाक ख्वाबो का प्यार बनके सिमट जाना चाहता हूँ तुझमें ।
अंदाज तेरा है निराला प्यार करने का, नाम प्यार का लेके मौका भोंका है तेरे सीने में खंजर हमने ।
फिर भी चाहते है तेरी कृपा झूठा ही सही प्यार करने का दम तो भरते हैं सामने तेरे ।
कब तक चलेगा किस्सा, किस्सा तमाम तुझे छूपे हुये मेरे भीतर के रावण का ।
जो जान है तुली हुयी है लेने को तेरी जान बनके जान के नाम पे कर दे उसे तू बेजान ।
कितनी भी कोई उंगली उठाये तुझपे पर तेरे न्याय के आगे झुकाया है सर
सदा सबने ।
हम भी इकरार करते हैं तेरी हर बात का तू भी स्वीकार करके बदल दे मेरे दिल को


- डॉ.संतोष सिंह