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Hymn No. 865 | Date: 19-Mar-1999
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क्यों रहता है तू दूर-दूर मुझसे, सनम आज तू सच-सच बता दे ।
क्यों रहता है तू दूर-दूर मुझसे, सनम आज तू सच-सच बता दे ।
प्यार किया है कोई जोरा-जोरी नहीं, जब देखूँ तू रहता है चुपचाप मुझसे ।
गलती मानता हूँ कई बार किया हमने, ऐसा कुछ न है भूलाया जा सकता नहीं।
एक तरफा ही सही प्यार तो प्यार होता है, यार कुछ दिल रखने के वास्ते बोल दे ।
जानता है तू जी नहीं सकते हम तेरे बिना, फिरभी तड़पाये बिना चैन नहीं आता दिल को तेरे ।
गुरुर न है हमें किसी बात का, अदना सा मैं, कहाँ तू अचल लोको का स्वामी।
झिझक अब भी न है हममें, प्यार किया है झुकके झुकाना सीख जायेंगे जरूर।
किसी न किसी बहाने याद कर लेते है तुझे, फरियाद मत समझना तू इसे ।
रात की बात बताऊँ तू कहना मत किसी से, दिल जब चाहे तब दीदार करता है तेरा ।
हैरत में न पड़ना, प्यार का जादू चलाऊँगा ऐसा, तू दौड़ा चला आयेगा करीब मेरे ।


- डॉ.संतोष सिंह