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Hymn No. 869 | Date: 20-Mar-1999
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तेरे नाम का जाम का दाम होगा इतना, आधी उम्र गुजर गयी चुका नहीं पाया।
तेरे नाम का जाम का दाम होगा इतना, आधी उम्र गुजर गयी चुका नहीं पाया।
कभी दिल में ख्याल उठता है, तूने हमें ईनाम दिया है या सजा ।
प्यार से तूने शिकार किया बहुतों का, सारी उम्र तरस गये वे दीदार को तेरे ।
हर बात का अर्थ है तेरे पास, हमारे प्यार का अर्थ तू न निकालना ।
चाहे कितना भी तू कुछ समझ ले, इतने बुरे भी न है जो तेरे करीब न आ सके हम ।
वादा किया बहुत बार निभा न पाया एक बार, पर दिलने प्रयत्नों को न है छोड़ा
कमियाँ हो चाहे लाख हममें, मुँह चुराके जीना न है सीखा ।
भागा-भागा फिरता हूँ आज जरूर तेरे पीछे, इक दिन ले भागूँगा साथ तुझको ।
आगाह किये देता हूँ सनम प्यार की डोर से बांधके खींच लाऊँगा तुझें ।
मुनासिब हूँआ तो जीते जी तेरे प्यार का पर्याय बनके दिखाऊँगा ।


- डॉ.संतोष सिंह