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Hymn No. 870 | Date: 21-Mar-1999
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तेरा लाख-लाख शुक्रिया जो करीब बुलाया अपने हमको ।
तेरा लाख-लाख शुक्रिया जो करीब बुलाया अपने हमको ।
सोचा न था कभी वो पास आके जाना हमने तेरे ।
जनम तो कई बार लिया था, मुलाकात तो हुई इस बार ।
संजोया हुआ हर सपना, यथार्थ में ढलने लगा पास आके तेरे ।
अनकही कहानी को पूरा करने की राह दिखाई तूने।
बातों के संसार से निकलके, सत्यमय जगत का भान हुआ तेरे संग ।
प्यार की कहानी बहुत सुनी थी, प्यार करना सीखा पास आके तेरे ।
डूबा था माया में, डूबा भी जान गया प्रभू तेरी कृपा से ।
जुदाई किसे कहते हैं खुदा तेरे विरह में पाला पडा उससे भी ।


- डॉ.संतोष सिंह