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Hymn No. 872 | Date: 23-Mar-1999
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तुझको क्या मालूम प्रभू, क्या गुजरती है हमपे तेरे इस जग में ।
तुझको क्या मालूम प्रभू, क्या गुजरती है हमपे तेरे इस जग में ।
इतना गहरा माया का जाल बुना तूने, तुझको तो भूले, खुदको भी भूल गये ।
तुझसे हमने सवाल किया कई बार, जवाब तेरा कुछ समझ न पाये ।
तोड़ देना चाहते हैं तेरे इस अभेद चक्र को, लहुलुहान होके हैं रह जाते ।
असहाय हुआ नहीं हूँ, फरियाद तुझसे न करुंगा ।
याद आ जाता है जब तू हमारे दिल को भूला बैठते हैं पल भर के लिये जहाँ को
कौन सी खता हुयी थी, जो तूने दे दी इतनी कडी सजा ।
मानने वालों में से मैं नहीं, पलट के चलना तूने सिखाया न कभी ।
जो हो रहा है मेरे संग, अच्छे के सिवाय कुछ न हो सकता ।
आज नहीं तो कल समय के संग, धैर्य रखके करेंगे तेरा इंतजार ।


- डॉ.संतोष सिंह