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Hymn No. 873 | Date: 23-Mar-1999
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प्यार और युध्ध में अगर सब जायज़ है, तो कोई दोष न है हमारा ।
प्यार और युध्ध में अगर सब जायज़ है, तो कोई दोष न है हमारा ।
जो कुछ भी किया तेरी माया के वश में होके, फिर भी प्यार तुझसे किया ।
सजा से बचने के लिये न देता हूँ दोष माया पे, होश गवाँया फँसके इसी में ।
जितना मजा न कर पाया उतना गया सताया, कैसे बताऊ क्या ना हुआ संग हमारे ।
हर बार गिरा, गिरके उठा चलने के लिये, तेरे सिवाय सहारा न माँगा किसी से।
दम का परवाह न किया, दम साथ छोडता गया, हर कदम पे तेरा नाम लेता रहा ।
प्यार में लुटाना सीखा है हमने लूटना नहीं, एक बार तो है ये हजार बार नहीं।
तुझे पाने के लिये कर गुजरेंगे वो सब कुछ, जो करने से मुलकात हो तुझसे ।
हाँ शुक्रिया अदा करता हूँ तेरा, मौका एक बार नहीं कई-कई बार दिया तूने हमें।
जीवन का हर लम्हा वो गुलजार हुआ, जो साथ गुजारा हमने तेरे संग ।


- डॉ.संतोष सिंह