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Hymn No. 875 | Date: 23-Mar-1999
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दिल मेरा लगता नहीं, पल भर के लिये तेरे बिना ।
दिल मेरा लगता नहीं, पल भर के लिये तेरे बिना ।
रख ले तू मुझे तेरी चाकरी में जो तू कहे वो करुंगा ।
जीवन में अब कुछ बचा नहीं, तेरे बिना आनंद आता नहीं ।
प्यार करना मुझे कभी आया नहीं, सीख जायेंगे जो साथ जो तेरा पाया ।
हर वो लम्हा न गवाँर लगता है, जब तुझसे दूर रह नहीं पाता ।
हसी की कोई बात नहीं, हर घडी बात करने को जी चाहे ।
अंदर से कुछ फूट रहा है, रोम-रोम उमंगो से मेरा है घिरा ।
हर पल जिरह चलती है तुझसे मन-ही मन में मेरे ।
दूरीयाँ बढ़ जाती है, जब पता चलता है अपने होने का ।
चिरकाल से इक सपना है संजोया, तेरे पहलू में सोने का ।


- डॉ.संतोष सिंह