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Hymn No. 876 | Date: 23-Mar-1999
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ज्वार सा उठता है तुझे लेके, बह जाता हूँ उसमें ।
ज्वार सा उठता है तुझे लेके, बह जाता हूँ उसमें ।
होश इतना भी न है रहता, श्वास चल रही है की बंद ।
लोग कहते है हाल बुरा होता है प्यार में ।
भला बुरा कि तो कौन कहे प्यार में तो प्यार होता है ।
अब तक बचा रहा कैसे मै इससे, सोंच में पड जाता हूँ कभी ।
उसका कहा ही याद आता है देर आये दुरुस्त आये ।
सनम न जाने कितने जनम लिये तेरे प्यार के वास्ते ।
हर चीज पे भारी है प्यार तेरा हम इसके आभारी है प्रभु ।
बन गया हूँ तेरा दरबारी उससे ज्यादा और क्या चाहिये ।
हर चाहत पे भारी है तेरी चाहत मिलती है उसीसे राहत ।


- डॉ.संतोष सिंह