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Hymn No. 877 | Date: 24-Mar-1999
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निगाहों से तीर चलाना सीख गये हम तुझसे ।
निगाहों से तीर चलाना सीख गये हम तुझसे ।
ललकारते है हम, प्यार में करेगे पहला वार तुझपे ।
बच न पायेगा तू, घायल सरेआम कर देंगे तुझे ।
होशोहवाश गुम हो जायेगा, बंध जायेगा प्यार में तू हमारे ।
परिणाम की परवाह किसे है, सरफरोशी की है तमन्ना ।
हलाल तो होना है आज नहीं तो कल काल के हाथो ।
डर-डरके जीने से अच्छा है, प्यार में कुर्बान हो जाये ।
हजार जिंदगी लेके क्या फायदा, जो तुझे प्यार न कर पाये ।
अजीब दास्ताँ है मेरी तीर चलाया था तुझपे घायल खुद हुआ ।
परिणाम की परवाह न है, खत्म हो जाने दे आज मुझे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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ज्वार सा उठता है तुझे लेके, बह जाता हूँ उसमें ।
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