VIEW HYMN

Hymn No. 88 | Date: 10-Mar-1997
Text Size
डरना नहीं है अब किसी से प्यार करना है सबसे,
डरना नहीं है अब किसी से प्यार करना है सबसे,
ज्ञाति अलग – अलग है तो क्या, से बंदे है हम एक खुदा के ।
त्याग देना है अब अपने मन की ईर्ष्याओं और शंकाओं को;
निशंक होके अपनाना है तुझको और तेरे लोगों को।
पाने और खोने की चिंता से मुक्त, हर वक्त जुबां पे हो नाम तेरा ;
कल्पनाओं के इस संसार में, हर वक्त जीना है तेरे संग ।
तेरा मेरा क्या है सब कुछ सौंप देना है तुझको ;
सुख हो या दुःख हर हाल में रहना है आनंद में ।
हर एक बंधन को तोड़, बंध जाना है तेरे बंधन में ;
जीवन के हर रंग को छोडके, रंग जाना है तेरे रंग में।


- डॉ.संतोष सिंह