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Hymn No. 883 | Date: 26-Mar-1999
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कलम से पन्ना न काला करता हूँ, ये तो दिल का हाल बयाँ करता हूँ ।
कलम से पन्ना न काला करता हूँ, ये तो दिल का हाल बयाँ करता हूँ ।
एक-एक शब्द उतने ही खरे है, जितना तू है हमारे करीब ।
नसीब बदलने की बात न कहता हूँ, प्यार के सिवाय कोई आरजु न है ।
कुछ कमी के वजह से न हूँ रोता, तुझे याद करते-करते अनजाने में भीग जाती है आंखे ।
सलामती का कोई शौक न है मुझे, बिखर जाना चाहा हूँ तेरी यादों में ।
कमल का फूल बनके गीरना चाहूँ तेरे चरणो में सँवर जायेगा जीवन मेरा ।
गीत बनके गूंजू तेरे चारों ओर कही भीतर से तृप्त हो जाऊंगा मैं ।
तेरा चरण पादुका बन जाना चाहूँ तेरी सेवा करते बीतेगा हर लम्हा मेरा ।
ऐसा कुछ हो जाये मेरा ज्ञान मिट जाये, ये पागल तुझे सबमें देखके तेरा हुक्म बजाये ।
मैं मेरा कुछ भी न हूँ चाहता तिल- तिलके तडपूँ तेरे प्यार में ।
- डॉ.संतोष सिंह
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