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Hymn No. 885 | Date: 27-Mar-1999
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मग्न मन मंदिर में प्रवेश करो प्रभु, पुकारता है तुझको तेरा दास ।
मग्न मन मंदिर में प्रवेश करो प्रभु, पुकारता है तुझको तेरा दास ।
सेवा में रत हूँ तेरी, भान न हो मुझे समय गुजरने का ।
बलि चढाता हूँ तेरे चरणो में, जो कुछ भी कहलाता हो अपना ।
संग उन सबका छोड दूंगा, जो चित्त को है मोह में डालते ।
प्रभु तेरे सिवाय मै किसी को पहचानना नहीं चाहूँ, रंग लूंगा तेरे प्यार भरे रंग से ।
डोलते हुये मन को नाथ लूँगा, जो साथ तेरा मै पाऊं ।
हर उन अनजान राहों पे करुंगा इंन्तजार तेरा, जहाँ से तेरा आना हो ।
मैं तुझको अपना बनाना हूँ चाहता, मिटना पड़े चाहे मुझे ।
मेरे मौला तकदीर में तू न है परवाह नहीं, तेरे दर पे बैठके गाता रहूँगा ।
लुटाना पडा सब कुछ लुटाऊँगा, कहाँ कुछ मेरा जाने वाला ।
- डॉ.संतोष सिंह
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