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Hymn No. 887 | Date: 27-Mar-1999
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मौका आज मिला है, हाले दिल सुनाने का ।
मौका आज मिला है, हाले दिल सुनाने का ।
तेरे करीब आते ही, गुम हो जाते है शब्द मेरे ।
मुस्कान तेरी देखके, विभ्रमता का हर जाल है टूट जाता ।
मन के भीतर संजोया हुआ, तू जान लेता निगाहों से ।
कशिश तेरी ऐसी है, उठने का न मन करता ।
पैरो में पंख लग जाते हैं, जब आना होता है करीब तेरे ।
धरा का धरा रह जाता है, ज्ञान तेरे सन्मुख आते ही ।
न जाने तू क्या कर जाता है, रोम रोम झूम उठता ।
हर शर्म हो जाती है खत्म, तेरा प्यार पाते ही ।
कहाँ तू, कहाँ मैं, फिर भी प्यार किया तूने मुझे ।


- डॉ.संतोष सिंह