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Hymn No. 890 | Date: 28-Feb-1999
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मिलने को जो था, वो मिल गया मुझे ।
मिलने को जो था, वो मिल गया मुझे ।
निगाहो से अपने प्यार का प्याला पिला गया ।
दिल के तार झनझना उठते है ख्याल आते ही ।
रोम-रोम मेरा स्वर्गीय आनंद से भर उठता है उसे पास पाते ही ।
दिवाना हो चुका हूँ उसका, पूजा मेरी प्यार में जो बदल गयी ।
सुख-दुःख का भान न होता है, मन को अहसास जब उसका रहता है।
बेकरार हो उठता है, संदेश जब मिलता है उसका ।
इंतजारी मेरी इम्तहाँ में बदल गयी, सुकूँ मिलता है जब गूंजे गीत उसका ।
अहसास न था हमको, उसके प्यार का ।
जब हर लम्हा न गवारा लगने लगा उसके बिना तो ध्यान आया ।


- डॉ.संतोष सिंह