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Hymn No. 892 | Date: 29-Mar-1999
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चल पडा, चल पड़ा तेरी ओर परिणाम की परवाह न है मुझे ।
चल पडा, चल पड़ा तेरी ओर परिणाम की परवाह न है मुझे ।
प्यार में तेरे बेखबर, मंजिल से अनजान मैं चल पड़ा तेरी ओर ।
गीत गूंजे जिस ओर से तेरे, उसी ओर बेधड़क बढ़ता चला गया ।
फिजाओं ने बतायी कहानी तेरी, यारों को पता था तेरा ठिकाना ।
हर राह पे छोड रखी थी तूने पहचान अपने कदमों की ।
गुनगुनाते हुये मिल रहे थे तेरे गीतों को पक्षी, जो तू सुनाते ये गुजरा था ।
स्तब्ध रह जाता राह की सरलता देखके, फिर क्यों हम हैं भटक जाते ।
भटकना कबूल करता हूँ, अटकना मंजूर न है मुझे ।
प्यार तेरा बहुत है हमसे, कशिश हमारी खींच ले जायेगी तेरी ओर ।
डर न है मुझे कोई, बेसब्रा हो जाता हूँ तेरे लिये ।
- डॉ.संतोष सिंह
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प्यार की आग बठ़ती जाये मन में, खाक हो जाये तन मेरा ।
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