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Hymn No. 894 | Date: 29-Mar-1999
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अगाध प्रेम है तेरा, जो बरसता है हमपे सदा ।
अगाध प्रेम है तेरा, जो बरसता है हमपे सदा ।
मन निर्मल हो जाता है, तेरा सानिध्य पाके ।
दिल की हलचल शांत हो जाती है, सुनके तेरे गीतों को ।
रह नहीं जाता कही भी कुछ, मिट जाती है जीवन की सारी खटास ।
भर जाता है दिल मेरा, श्रद्धा और विश्वास से ।
तेरा प्रेम देखके रीझ जाते हैं, कही भी हो खिंचे चले आते है तेरी ओर ।
गुजार देना चाहते है जीवन, तेरे सम्मुख बैठके ।
राहत मिलती है पास आके तेरे, कोई भी बात का प्रभाव न पड़ता है मन पे ।
सुख-दुख की कोई बात न है, तेरा साथ है तो सब कुछ है हाथों में ।
कुछ न मिला तो कर लेंगे गुजारा, पर तेरा सहारा हो हर पल हमें ।


- डॉ.संतोष सिंह