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Hymn No. 895 | Date: 30-Mar-1999
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गौर से गुलाबी रंग हो गयो, प्रभु तेरो प्यार में म्हारो ।
गौर से गुलाबी रंग हो गयो, प्रभु तेरो प्यार में म्हारो ।
हमने भी न जाना था, प्रभु तू शरमा जायेगा प्यार देखके म्हारो ।
भूलो मैं सब कुछ नजर मिलते ही तुझसे, स्तब्ध रह गयो निहारते तुझे ।
भेद मिट गयो नजर का, जब समाता देखो सबको तुझमें ।
ध्यान जब अपने आप पे आयो, नजरों से पी हुयी न उतरी थी अब तक ।
ढूँढों इधर-उधर चारों ओर कही न मैं नजर आयो।
सोच में पड़ गयो, मैं किसे ढुढतो थो ।
जिसे ढूँढने निकलो थो वो मारो रूप में चारों ओर खड़ो थो ।
भेद मिट गयो सारो, शरम पे भी प्यार का रंग चढ़ गयो।
तन-मन का भेद भूलाके, तू म्हारे दिल में बस गयो ।
- डॉ.संतोष सिंह
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