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Hymn No. 896 | Date: 30-Mar-1999
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क्या फरक है पड़ता तू रहे करीब या दूर मुझसे ।
क्या फरक है पड़ता तू रहे करीब या दूर मुझसे ।
गम किस बात का करुँ मैं, समझ में न आये ।
मगरूरियत न है ये मेरी, ये तो दिल ही जानता है ।
मन के सारे भेद मिट चुके है, तेरे प्यार में पड़के ।
कैसे कहूँ प्रभु मुलाकात न होती है तुझसे ।
दिल को ये अहसास हमेशा रहता, पलक झपकते बात जो तुझसे कहता ।
पाना और न पाना क्यों इस चक्कर में है पड़ना ।
जब चाहे तब दीदार तेरा करते है, नींद में हो या जागे हुये ।
गलत और सही का डर निकलता जा रहा है मन से ।
जब सब कुछ मेरे या मै उनके अनुकूल हो गया हूँ ।
ये बेतुकी बातें मै क्यों कहने लगा, जब तू है सब जानता, है ऐसा दिल मानता।
अहसास भी जाता रहा कहने करने का तेरे प्यार में ।
सुबह हो या शाम, सब एक सा है नजर आने लगे तेरे प्यार में ।


- डॉ.संतोष सिंह