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Hymn No. 897 | Date: 30-Mar-1999
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सबसे बडा मुकाम है सनम का दर, जिसके लिये लेते हैं न जाने कितने जनम।
सबसे बडा मुकाम है सनम का दर, जिसके लिये लेते हैं न जाने कितने जनम।
आरजु रहती है सदियो से दिल में दीदार के वास्ते, जाता है रास्ता उसके दर की ओर ।
चलना पड़ता है बिना हिचक के, कसक हो इतनी दम न ले पल भर के
लिये ।
जतन करना पड़ता है पल-पल प्यार का, उतनी गहरी छाप पडती है दिल पे प्यार की ।
इंतजार का इम्तहाँ देना पड़ता है, अपने आपको कुर्बान करना पड़ता है प्यार में ।
उधार कुछ नहीं रखता है वो, प्यार में तेरे खोके आकार लेता है धरा पे ।
प्यार करके निभाना सीखा है उसने, दामन जिसने पकड़ा सदा साथ रहा
उसके ।
रिश्ता जो भी कायम किया साथ उसके, मुताबिक रूप धरके पास आयेगा
तेरे ।
उसकी छत के नीचे ली शरण जिसने, तारण बना अपने प्यार के लिये ।
मिल जाना उसका है सब कुछ पाना, मौत और जीवन के भेद से उबर जाना ।


- डॉ.संतोष सिंह