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Hymn No. 898 | Date: 30-Mar-1999
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रूप बदलता है, रंग बदलता है, प्रभु के संग रहने पे अंग-अंग बदला है ।
रूप बदलता है, रंग बदलता है, प्रभु के संग रहने पे अंग-अंग बदला है ।
दिल मचलता है, मन न माने उसके पास जाने को हर पल रहता है बेचैन ।
लिखी लिखायी न कहता हूँ, हम तो दिल की हर वो बात कहते हैं जो रहती
है ।
उमंगो से भर जाता हैं जीवन जो मिल लेते है कुछ पलों के लिये उससे ।
सच पूछो तो जी नहीं भरता, घंटो बदल जाते हैं मिनटो में पर प्यास बुझती नहीं ।
आज नहीं तो कल चलना है साथ उसके, आधी-अधूरी तैयारी कर दिखायेगी पूरी।
उसके आगे रह न हया है कुछ जरूरी, प्यार से हो जाती है सब कुछ पूरी ।
दूरी तो बहुत है अब भी बहुत है पर हर गीत उसके बंधाते जा रहे है हौंसला ।
झूठ न हूँ कहता जब भी आता हूँ उसके पास से दिल की हर बात होती है जुबाँ पे ।
मेरे वश की बात न है कहाँ हुआ उसका कर पाना ही कराये बिना ना छोड़ेगा हमें ।
- डॉ.संतोष सिंह
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