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Hymn No. 902 | Date: 31-Mar-1999
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गाता है दिल मेरा देखके तुझे, न जाने कौन कौन से सुरो में ।
गाता है दिल मेरा देखके तुझे, न जाने कौन कौन से सुरो में ।
आलाप जो कभी सुन रखा था, वो भी लगाता हूँ डूबके तुझमें ।
मत देख हैरत भरी निगाहो से, तेरे प्यार में जुर्रत बढ़ती जा रही है मेरी ।
दिल क्यों न लगायेगा तू मुझसे, मजबूर कर देंगे हम तुझको ।
अरे जा जा जहां भी तू जायेगा, इस मजनूँ को भुला न पायेगा ।
मार खा लेंगे, सुन लेंगे गाली, खाली पीली में तू तो मानेगा नहीं ।
जानता हूँ होश फख्ता हुये है, अच्छे अच्छो के तेरे पीछे ।
मै भी किसी से कम नहीं, आखीरकार तेरा ही तो चेला हूँ ।
गुरु तु कितना गुरु हो, आजमा लेना अनजान राहो पे भेजके तू मुझको ।
हिम्मत न हारूंगा पूरा कर दिखाऊंगा तेरे प्यार के सहारे ।


- डॉ.संतोष सिंह