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Hymn No. 907 | Date: 01-Apr-1999
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ख्वाहिशे तो है अनेक, पर हम है तो एक ।
ख्वाहिशे तो है अनेक, पर हम है तो एक ।
किस-किस की करूँ पूरी, पूरी करते करते मिट जाती है जिंदगी ।
नया न कुछ कर पाया, पुराने को दोहराते बीता जीवन ।
जिसने सदा साथ निभाया, उसको अपना बनाना न आया ।
हजरत तुझसे दरकार है, कर ले हमारे प्यार की स्वीकार तू ।
नजरों से छलकता है प्यार मेरा, याद करके तुझे ।
साथ जब से तेरा मिला, दिल की हर साथ पूरी होने लगी ।
जंग लड़ने न आया जीवन में, प्यार जबसे हुआ सीख गये लड़ना ।
कुछ कमा के कहाँ ले जाना, प्यार में गँवाना चाहता हूँ खुदको ।
खाक से उभरा हूँ खाक में मिलूँगा तेरे प्यार के सहारे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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