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Hymn No. 909 | Date: 02-Apr-1999
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खामोशी तेरी ये सही नहीं जाती, कुछ कह दे कम से कम निगाहों से ।
खामोशी तेरी ये सही नहीं जाती, कुछ कह दे कम से कम निगाहों से ।
हम भी कम नहीं, तेरी हर बात शब्द बनके उभरेगी हमारे दिलो में ।
तरस न तुझे आता है तो, मिलना हमे आता है आंखो को बन्द करके ।
परवाह न करता तेरे आने की, जहाँ होता है तू वहाँ हम खिंचे चले आते है ।
हाथों में है तेरे सब कुछ तो क्या से, हमारे हाथो में है तेरे प्रेम की लकीर ।
इकरार न करता है तू मुलाकात करके कितना भी कर ले इन्कार मानेगे न हम ।
दावा तो न हूँ करता पर तुझे रिझाये बिना मेरे दिल को चैन नहीं आयेगा ।
आशिक होगा तो बहुत बड़ा पर दिल फेंक है हमभी किसी से कम नहीं ।
छुप ले आज कितना भी ढा के सितम हम भी चैन तेरा चुराये बिना मानेंगे नहीं
जानम दे देंगे जान पर पकड़ा है जो तेरा साथ तुझे पाये बिना मानेंगे नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह