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My Divine Blessing
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Hymn No. 920 | Date: 04-Apr-1999
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एक की कहूँ या दूसरे की, मेरे मन में न है कुछ कहने को ।
एक की कहूँ या दूसरे की, मेरे मन में न है कुछ कहने को ।
ताकत मिलती है तेरी नजरो से, जिनसे टपकता है निर्झर प्यार तेरा ।
दो घूंट पी लेते है भरके आंखो के प्याले से, आनंद से भर जाता है रोम रोममेरा ।
दिल के भीतर मिल जाता है हर इक सवाल का जवाब, जिन्हे ढूंढता था यहां-वहां ।
सच पूछो तो कहने को कुछ रह नहीं जाता, अंदर-बाहर एक सा हो जाता है ।
बोल तेरे अमृत से बढ़के है, जो घोलते हैं जीवन में संगीत मेरे ।
तेरी निगाहे जो पड़ती हैं हमको हर सजा, जिनको झेलने से निकले चाहेजान ।
मतवाला बनाके छोड़ा है तेरे गीतों ने, जीते जी हमको जो जीत लिया हमसे ।
मजबूर न कर हमको ढोने के लिये लाश तन की, घर बना लेने दे हमको दर पे तेरे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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बनते देखा, बिगड़ते देखा, तेरे हक में सब कुछ बदलते देखा ।
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