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Hymn No. 92 | Date: 26-Mar-1997
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है मुझे जरूरत तेरी ही जरूरत, सिर्फ तेरी ही जरूरत, तेरी ही जरूरत
है मुझे जरूरत तेरी ही जरूरत, सिर्फ तेरी ही जरूरत, तेरी ही जरूरत
चैन आयेगा मुझे मिलने से तुझे, मिलेगी मेरे दिल को तसल्ली ।
रूठा हुआ है तू क्या से, मनाना मेरा धर्म है तुझे ।
तेरा संग ना हुआ तो क्या से, तेरे सपनों के संग रखता हूँ जीने का हक ।
नाहक ना हूँ मैं परेशान है मुझे तेरी ही जरूरत, तेरी ही जरूरत ।
तेरी हर अदा पे रीझ जाता हूँ मैं, जिंदगी के हर जख्मों को भूल जाता हूँ मैं ।
सता न मुझे इतना देगा दोष जमाना तुझको ये भी लगेगा नागवार मुझको ।
है मुझे तेरी ही जरूरत, सिर्फ तेरी ही जरूरत; तेरी ही जरूरत ।


- डॉ.संतोष सिंह