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Hymn No. 93 | Date: 27-Mar-1997
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लाखों की बात ना मैं करूं, हैरान हूँ में अपनी किस्मत पे,
लाखों की बात ना मैं करूं, हैरान हूँ में अपनी किस्मत पे,
लाख पुकारा मैंने तुझको पर तू न आया, खुद ब खुद तेरे पास चला आया।
रमना चाहता इस संसार में रम न पाया, अंजाने ही तुझमें रमता चला गया।
लोगों की परवाह ना करता था मैं, आन तेरी हर बात की परवाह करू
किसी को आज तक खुश कर न पाया मैं, तेरी खुशियों पे सर्वस्व लुटाना चाहूँ ।
जीत का दामन छोड चुका था मैं, हार के संग जीने को मजबूर था ।
तेरे प्यार ने वो कर दिखाया, जीतने के लिये ये सारा जग पड़ गया छोटा ।
डूबने वाले को तिनके का सहारा है काफी, मुझे चाहिये बस तेरे दामन का सहारा ।
दिल करता है हर वक्त सोया रहूँ तेरे आगोश में, सुध ना हो मुझे किसी बातकी
तमन्नाओं का क्या कहना, लेती है जन्म हर वक्त, तेरे दिल की हर बात मेरे दिल में हो।


- डॉ.संतोष सिंह