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Hymn No. 924 | Date: 05-Apr-1999
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सुबह हो तो शाम की बात रहती है ।
सुबह हो तो शाम की बात रहती है ।
तन हो तो मन की बात होती है ।
प्यार हो तो दिल की बात कहते है ।
मिलन हो तो बिछुड़ने का डर रहता है ।
लगन हो तो मुलाकात की चाह होती है ।
जीवन हो तो मौत का भय रहता है ।
इंसान हो तो जात-पात पूछी जाती है ।
अमीर हो तो निर्धन होने से घबराता है ।
खुशी हो तो दुख का भय होता है ।
प्रभु हो तो इच्छाओं की मांग करते हैं ।
कहीं भी कुछ होने न होने में गुजरता है जीवन ।
सत्य से भी कुछ मांगने की चाह होती है ।
सदगुरु को ऐसा पाया, जहाँ सब कुछ होके भी कुछ न पाया ।
जिये जीवन माया के संग, या दूर रहे उसकी छाया से ।


- डॉ.संतोष सिंह