VIEW HYMN

Hymn No. 925 | Date: 05-Apr-1999
Text Size
माफ करना प्रभु अब ये बात न होगी, तेरी मुलाकात के सिवाय कोई आस न होगी ।
माफ करना प्रभु अब ये बात न होगी, तेरी मुलाकात के सिवाय कोई आस न होगी ।
काश कहाँ हुआ मेरा मैं कर पाता, तेरे आशीष से सुधर जाता ।
राह है कठिनाइयों से भरी हुई, तेरे प्यार की वजह से दिल डरा नहीं ।
चित्त हो जाये मुक्त चिंता से, परिणाम की परछाई न पड़े मन पे ।
तेरा साथ जो पाये तो न होने का भय क्यों करना, तेरी रौ में बहते जाना ।
आना फिर हो या न हो, इस पल को हाथों से क्यों खोने देना ।
हमारे हर सवाल का जवाब तू है, तेरे सिवाय साथ न है किसीका ।
जो कल के कल को है करना, उसीको करने से फिर आज क्यों है डरना ।
मौत और जीवन को भुलाके, तेरे चरणो में होश गवाँ देना ।


- डॉ.संतोष सिंह