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Hymn No. 933 | Date: 07-Apr-1999
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मिल गया, मिल गया मुझे मिल गया वो जिसके लिये जन्म लेते है जीव ।
मिल गया, मिल गया मुझे मिल गया वो जिसके लिये जन्म लेते है जीव ।
मन के सारे भेद खत्म हो गये, जो दिल में मेरे समा गया वो ।
निकले थे जिसकी तलाश में, अनजाने में साथ उसका पा गये ।
सोचा हुआ समझ न पाया, मुलाकात में वो दिल को रास आ गया ।
मगन होने लगा मैं उसमें, जैसे जैसे गूंजते गये गीत दिल में उसके ।
सबके साथ रहते हुये, पर पाया हमने उसको सबमें ।
अंदाज मत पूंछ कितनी निराली है उसकी माया, उसके सामने सब लगते है खाली – खाली ।
नजरों- नजरों से बहुत कुछ देता है वो, दिल करता है पागल हो जाये उसपे ।
होठों पे रहती है आनंदभरी मुस्कान, हवा हो जाते हैं मन के सारे भाव ।
सहजता सरलता देखके उसकी, अनजाने में त्याग देते हैं अपने मोहो को ।


- डॉ.संतोष सिंह