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My Divine Blessing
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Hymn No. 944 | Date: 09-Mar-1999
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पीने लगा हूँ तेरे नाम का जाम, गया भूल सब काम ।
पीने लगा हूँ तेरे नाम का जाम, गया भूल सब काम ।
दाम देके पाया नहीं है, ये तो है तेरे प्यार का उपहार ।
दिल से उठती है सदा बहार, झूमता जिसमें तन-नम मेरा ।
मधहोशी के आलम में है, तू बन गया है मेरा बालम ।
प्यार का आलम है ऐसा छाया, खेल खेलते है इक दूजे से ।
सुध खोता जा रहा हूँ, जैसे चढता जा रहा है प्यार का सुरुर ।
शक होता है अपने पर, बावरा बन गया है कब से ।
अपने होने का खयाल भी, अब अच्छा नहीं लगता ।
सच्ची सच्ची बात हूँ कहता, बेसुधी का आलम अब है अच्छा लगता ।
मिटा दे मेरे मैं को तेरे प्यार से, न की तेरी खुदाई से ।
- डॉ.संतोष सिंह
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झुमने दे तु आज मुझे, होके मगन तुझमें ।
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देखके तो साक्षात मुर्त रूप में, दंग रह गया मैं ।
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