VIEW HYMN

Hymn No. 954 | Date: 11-Apr-1999
Text Size
कहाँ हुआ कर दिखाऊंगा, प्यार को जीते जी तेरे पा जाऊंगा ।
कहाँ हुआ कर दिखाऊंगा, प्यार को जीते जी तेरे पा जाऊंगा ।
इज़हार है दिल को तेरे प्यार का, यार तेरे दर से झोली भरके जाऊंगा ।
मजबूर होगा तू मेरे प्यार में, तेरा दिल बाध्य होगा कहाँ हुआ मेरा मानने को।
इनकार की परवाह न है मुझे, इज़हार करता रहूँगा प्यार का अनंत काल तक।
प्यार जताना हमें आता है तो, दिल से दिल को सताना आता है प्यार से ।
खाली जाने न देंगे तेरे किसी वार को, झेल जायेंगे दिल पे तेरे हर हथियार को।
कातिल तुझसा बडा कोई नहीं, प्यार में न जाने कितनों का किया है काम तमाम।
आरोप लगाता नहीं जग जाहिर बात हूँ कहता, तेरा प्यार पाने के लिये ।
रात को भी तूने न छोड़ा है, प्यार में जख्म दिया ख्वाबों में आके ।
अंदाज न है तुझे हमारे प्यार का, तू होगा दुनिया में कही भी पहुँचेंगे लेके प्यार की सौगात ।
खाक में मिलेंगे कई बार, जब भी बनेंगे बिना मिले मानेंगे नहीं ।
जो कर लेना है वो कर लेना, प्यार किया है कोई चोरी नहीं ।


- डॉ.संतोष सिंह