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Hymn No. 955 | Date: 11-Apr-1999
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तू जो भी कहे वो मानूंगा, तेरा कहाँ हुआ कर दिखाऊँगा, तुझे पाने के लिये ।
तू जो भी कहे वो मानूंगा, तेरा कहाँ हुआ कर दिखाऊँगा, तुझे पाने के लिये ।
कैसे समझाऊं, क्या हो गया है मुझे, तेरे प्यार की मस्ती में खो गया हूँ ।
चिंता नहीं किसीकी, होश न है मुझको अपना, जब देखो तब सपने देख रहा हूँ तुझे लेके ।
आसान न है प्यार पाना तेरा, जो सब करते हैं उससे कुछ अलग कर जाना चाहता हूँ ।
देखेगें प्यार में पासा पहले कौन फेंकता है, मौत और जीवन दोनो में चाहता है मुलाकात ।
हश्र की परवाह है किसे, रह नहीं पाऊंगा बगैर तेरे, डर न है मुझे अब किसीका
सीखा है तुझसे प्यार करना, प्यार के नशे में सब कुछ भूला देना ।
मन की सारी आशंकायें मिटती जा रही हैं, बेखौफ हो चुका है दिल प्यार में तेरे
कभी-कमार शरारत करने को है दिल करता, चुपके से खो जाने का मन है करता तेरे पहलु में ।
तू ही बता कब तक चलता रहेगा, इकरार कब करेगा हमारे प्यार का इंन्तज़ार हम करेंगे ।
- डॉ.संतोष सिंह
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कहाँ हुआ कर दिखाऊंगा, प्यार को जीते जी तेरे पा जाऊंगा ।
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अंदाज मोहब्बत का हमे न था, प्यार का कोई अनुभव न था ।
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