VIEW HYMN

Hymn No. 958 | Date: 12-Apr-1999
Text Size
प्यार जब सर पे चढ़के है बोलता, परवाह न है करता जमाने की ।
प्यार जब सर पे चढ़के है बोलता, परवाह न है करता जमाने की ।
सरेआम दिल का हाल हूँ कहता, सुनने सुनाने की परवाह किये बगैर ।
बन गया है प्रेम मेरा जिगर का टुकडा, लगाये न लगता कोई रोग दूसरा।
जिधर से तू है निकलता, मजबूर कर देता है सब भुलाके दिलों को झूमने के लिये ।
बहारों के संग-संग चलना पड़ता है उसके, अच्छे-अच्छे घुटने टेकते हैं उसके आगे ।
लड़ता नहीं है वो किसीसे, मनों को मोह लेता है जो पास आया उसके ।
जो काम कोई न है कर सकता, वो काम प्यार से वो है कर जाता ।
जब एक बार दिल को प्यार हो जाता है उससे, तो रातों की नींद है चुराता ।
गाता है गीत वो बेचैन कर जाता है हमको, मन नहीं लगता किसी और में ।
जोर मारता है दिल, पता भी नहीं है चल पाता कब पहूँच जाते हैं पास उसके।


- डॉ.संतोष सिंह