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Hymn No. 959 | Date: 12-Apr-1999
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ऊपर उठाना होगा, ऊपरवाले के लिये उसकी कृपा से ।
ऊपर उठाना होगा, ऊपरवाले के लिये उसकी कृपा से ।
प्यार किया है हिचकना क्यों किसीसे, कहनी पड़ेगी दिल की बात उससे ।
सलामती तू किसीकी चाहता है, छोड़ना पड़ेगा हर मोह प्यार में ।
खुशी और गम मनाना प्यार देखके, उसका रोना ना रोना कभी अपना ।
बर्बाद होता है इक दिन सब कुछ, तू जश्न मनाना बरबादियों पे अपने ।
निश्चित रहना दिल की राहों में, मैं का कोई रोड़ा मत अटकाना ।
हर मजबुरीयो को भूलाके, मजबूर बन जाना तू प्यार में उसके ।
किस्सा खत्म होता है तो होने देना, इससे अच्छी बात कहाँ ।
लाखों-करोडों मिन्नतो के बाद, मिलता है प्यार उसका उसकी कृपा से ।
तेरी हैसियत बना दे कितनी भो वो, धूल पैरो की उसके बनने के लिये उधत रहना ।


- डॉ.संतोष सिंह